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रविवार, 13 नवंबर 2016

भारत माँ की वंदगी

इससे अभी और जो व़यावसथा बेहतर चाहिये👆 तो देश को नेता नही  ,मोदी, सा मेहतर चाहिये ++ उठा सके जो भृषटाचार जैसी गंदगी! • भारत माँ की होगी सचची वंदगी ++ हेमराज सम

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर