मनो रोग के बैद से, कर बाई उपचार ।
उमिर भै अस्सी पार तउ, रोगी हमैं बिचार।।
कर बाई उपचार, दृष्टि मा दोख है दददा।
चीकन चांदन राह, लगै अपना का खडडा।।
बलिहारी या समय का कइसा हबय कुजोग।
जे हमार सम्माननीय ,ग्रस्त हें मन के रोग। ।
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
मेरी पसंद -------------- रात रात भर जाग के कागद रगे हजार। पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार। महाकवि आचार्य भगवत दुबे - जबलपुर