मौन के पीड़ा की अनुभूति देखिये।
सदाचार का भ्रष्टो से सहानुभूति देखिये। ।
विश्वास आहत हो रहा है लोक तंत्र का
पदों औ क़दों की प्रतिभूति देखिये। ।
हेमराज हंस
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
मेरी पसंद -------------- रात रात भर जाग के कागद रगे हजार। पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार। महाकवि आचार्य भगवत दुबे - जबलपुर