छन्द
सरग से नीक मोरे देस कै य धरती ही,
जिव से है अधिक पियार बंदेमातरं।
ताजमहल से ही स्वारा आना सुंदर य,
आपन माटी देश कै सिंगार बंदेमातरं॥
बहै नदी कलकल पानी करै छलछल,
टेराथें पहार औ कछार बंदेमातरं।।
जहां बीर बलिदानी भारत का बचामै पानी,
बलिदान होइगें पुकार बंदेमातरं॥
दोहा
बंदेमातरम मा भरा, देस राग का कोस।
आंखर आंखर मा हबै, देसभक्ति का जोस।।
उनही सौ सौ नमन जे किन्हिन जीबन हूम।
बंदेमातरम बोल के, गें फांसी मा झूम।।
बन्देमातरम गाइ के, देस लिहिस एक मोड़।
भिन्न भिन्न मत का दिहिस, एक मन्त्र मा जोड़।।
आबा सब जन पुन करी, नेम प्रेम कै बात।
भारत के दुसमन हमैं, नफरत के उत्पात ।।
हेमराज हंस - भेंड़ा मैहर
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