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मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

सरग से नीक मोरे देस कै य धरती ही,

             छन्द 

सरग से नीक मोरे देस कै य धरती ही,

जिव से है अधिक पियार बंदेमातरं।

ताजमहल  से ही स्‍वारा आना सुंदर य,

आपन माटी देश कै सिंगार बंदेमातरं॥

बहै नदी कलकल पानी करै छलछल,

टेराथें पहार औ कछार बंदेमातरं।।

जहां बीर बलिदानी भारत का बचामै पानी,

बलिदान  होइगें  पुकार बंदेमातरं॥

                 दोहा 

बंदेमातरम मा  भरा, देस  राग  का  कोस।

आंखर आंखर मा हबै, देसभक्ति का जोस।। 

 

उनही सौ सौ नमन जे किन्हिन जीबन हूम। 

बंदेमातरम   बोल   के,  गें फांसी  मा झूम।।  

 

बन्देमातरम गाइ  के, देस लिहिस एक मोड़।

भिन्न भिन्न मत का दिहिस, एक मन्त्र मा जोड़।।   


आबा सब जन पुन करी, नेम प्रेम कै बात। 

भारत के दुसमन हमैं, नफरत के उत्पात ।। 

हेमराज हंस - भेंड़ा मैहर 

सम्पर्क - 9575287490 

जहाँ बघेली आय के, होइगै अगम दहार।

जहाँ बघेली आय के, होइगै अगम दहार। 

काकू जी के बोल का,नमन है बारम्बार।। 


शम्भू काकू ता अहीं, रिमहाई के सिंध। 

देह धरे गाबत रहा,मानो कबिता बिंध।। 


गाँउ गली चउपाल तक, जेखर बानी गूँज। 

काकू जी ता भें अमर,ग्राम गिरा का पूज।।


लिहे घोटनी चलि परैं,जब कबिता के  संत। 

कविजन काकू का कहैं, रिमही केर महंत।।


जेखे कबिता के बिषय, आँसू आह कराह।  

अच्छर फरयादी बने, काकू खुदइ गबाह।।


आखर आखर मा बसय,काकू कै कहनूत। 

हंस  बंदना  कइ  रहा, धन्न   बघेली  पूत।। 

हेमराज हंस  भेड़ा 

सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

KAVI SAMMELAN -BAKIYA REWA 09.02.2026




रामपुर बाघेलान  के ग्राम  बकिया तिवारियांन के पावन धाम  श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर समिति द्वारा आयोजित विराट कवि सम्मेलन में  वाणी पवित्र  करने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ।  कविवर श्री SP तिवारी जी बकिया  के संयोजन , डॉ राम सरोज शान्तिदूत जी रीवा के सञ्चालन में कविवर श्री मैथिलीशरण शुक्ल मैथिली सीधी  ,श्री भृगुनाथ पाण्डेय भ्रमर रामपुर नैकिन  , श्री सुधाकान्त मिश्र बेलाला जी चाकघाट  , डॉ अरुणा पाठक आभा जी रीवा , हेमराज हंस भेड़ा  मैहर ने काव्यपाठ किया। 
धन्यवाद आभार  बकिया 


 

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

मंजू परिणय भास्कर 4 .2 .2026

जगत जननी माँ शारदा की असीम कृपा से हमारी भतीजी पद्मा (मंजू }सुपुत्री रामराज उरमलिया निवासी भेंड़ा मैहर का मङ्गल परिणय भास्कर तिवारी चिरंजीव श्रीयुत शारदा तिवारी जू निवासी अमिलिया कला मैहर के साथ फाल्गुन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि (बुधवार)विक्रम संवत 2082 4 फरवरी 2026, संपन्न हुआ। परिजन पुरजन इष्ट मित्रवर गणमान्य जनों का आत्मिय आभार





गुरुवार, 22 जनवरी 2026

SATNA --22.01.2026




 

MAHA KAVI SAMMELAN SATNA 22.01.2026


मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद मध्य प्रदेश शासन द्वारा सतना में एक दिवसीय बघेली साहित्य संगम का भव्य आयोजन किया गया।अकादमी के निदेशक माननीय श्री विकास दवे जी के मार्गदर्शन एवं श्री राकेश सिंह,श्री चंद्रकांत तिवारी,डाॅ. रामानुज पाठक एवं श्री अनिल अयान के संयोजन में बघेली भाषा एवं साहित्य के विविध पक्षों पर व्यापक विमर्श किया गया,जिसमें बघेली बोली के संरक्षण एवं उन्नति हेतु अनेक सुझाव भी वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए। जिसमें विशेष रूप से बघेली में गद्य साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन की आवश्यकता एवं घर परिवार में बघेली बोली में संवाद को प्रमुखता से उठाया गया। बघेली साहित्य संगम में अनेक वक्ताओं ने अपनी विचार रखे,जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. चंद्रिका प्रसाद चंद्र,श्री जयराम शुक्ल,डॉ राम गरीब पाण्डेय विकल, श्री सत्येंद्र सिंह सेंगर,डॉ.रामसरोज द्विवेदी शांतिदूत,श्री विभू सूरी, डाॅ.रंजना मिश्रा,श्री कनिष्क तिवारी,श्री भृगुनाथ पाण्डेय भ्रमर,डॉ. राजकुमार शर्मा राज 
 

बुधवार, 10 दिसंबर 2025

श्री शिवशंकर सरस जी


 श्री शिवशंकर सरस जी, बोली के चउमास। 

उनसे छरकाहिल रहैं, तुक्क बाज बदमास।। 

सादर ही सुभकामना, जनम दिना कै मोर। 

रिमही मा हें सरस जी , जस पाबस का मोर।।  

हेमराज हंस 

गुरुवार, 27 नवंबर 2025

गदहा परेशान है गईया के प्रतिष्ठा मा।।

 सुमर कै नजर नित  रहा   थी  बिष्ठा  मा। 

हमीं  कउनव सक नहीं ओखे निष्ठा मा।।  

सेंतय का  झारन  मा जरा  बरा जात  है 

गदहा  परेशान है  गईया  के प्रतिष्ठा मा।।   

हेमराज हंस 

मंगलवार, 25 नवंबर 2025

उच्च कोटि के नीच

 

राहू अमरित पी  लिहिस, जनता ओसे हीच। 

अइसै हेमय समाज मा, उच्च कोटि के नीच।। 


कहिन भुसुण्डी सुन गरूड़, तजै सुभाव न नीच।

गंग नहा ले सुमर चह ,तउ पुन लोटय कीच।।

हेमराज हंस  

धरम ध्वजा फहरी


धरम ध्वजा फहरी अबध, भारत गउरव पर्ब । 

मानो  सीना   तान  के,  करय  सनातन  गर्व।।    

शुक्रवार, 14 नवंबर 2025

श्री हरि कुशवाह ,हरि ,

 श्री हरि कुशवाह ,हरि ,

मैहर के कवियों में कुशवाह हरि एक जाना पहचाना नाम है। जो चाहे हिंदी में अपने गीत य ग़ज़ल लिखे य बघेली में पर जो भी लिखा वह ठोक बजाकर । इसीलिए शायद किसी ने कभी उनके बारे में कहा रहा होगा कि,
जेमा न नंचिउ खोट त ओही खरी कहा थे,
गइल चलत मिल जाय त ओही डरी कहा थे।
बइठ मंच पुटपार्थी के साईं बाबा कस,
मइहर के मनई सब उनही हरी कहा थे।।
पेशे से नगरपालिका के बरिष्ठ लेखापाल पद से रिटायर श्री कुशवाह ,हरि , का एक बघेली काब्य संकलन भी प्रकाशित है।
आइये पहले उनके गजल से ही शुरुआत करते है।
मन मा उचय सबाल त कइसा करी फलाने,
कउनों सुनय न हाल त कइसा करी फलाने।
पनही मिली उन्ही ता बारी क रउद डारिन,
उनकर बढ़ी मजाल त कइसन करी फलाने।।
नउपर के तुपक दारी मूड़े म धरे गोरसी,
झूरय बजामै गाल त कइसन करी फलाने।
नङ्गा नहाय तउनव निचोमय के फिकिर मा,
बनिया बने कंगाल त कइसा करी फलाने।।
आपन न टेट देखय आने कै फूली झाकय,
दुनिया क यहै हाल त कइसा करी फलाने।
भूभुर करय क पोहगर खुरखुंद त कइ डारिन,
मुखियय बने दलाल त कइसा करी फलाने।।
केतनेव क खाय डारिस या तन्चबूदी रोटी,
पेटय बना बबाल त कइसन करी फलाने।
हाथी निकर ग सगला बस रहिगे पूछ् बाक़ी,
अब गामै उय बेताल त कइसन करी फलाने।।
चलनी म दूध दुहि के रोमय लिलार काही,
बिगड़ी है उनकर चाल त कइसन करी फलाने।
नव सौ गटक के मुसबा हज का चली बिलारी,
अधरौ लिहे मसाल त कइसन करी फलाने ।।
चाकी परी य देश मा लूडा लगाय दीहिंन ,
सइया बने कोतवाल त कइसन करी फलाने।
कइसन कही कि रानी बइठी चुनू सम्हर के,
राजा करी हलाल त कइसा करी फलाने।।
निबले कै तो मेहरिया सब कै लगा थी भउजी,
बुढऊ जो ठोकै ताल त कइसा करी फलाने।
लिलरी न जियत माछी हमसे सुना हरी तुम,
रहिगा यहै मलाल त कइसा करी फ़लाने।।
यह तो रही श्री हरि कुशवाह की ग़ज़ल अब उनके एक गीत का भी जायका लीजिये।सकबन्धे म प्रान फलाने बलम सोचय म झुखाने।
कोरे कागद अउठा दीहिंन ,
बंधुआ बन के करजा लींहिंन।
ब्याज बरे हमहू से बेउहर बहुत बेर फुहराने,
बलम सोचय मा झुखाने ।।
जब थाने मा रपट लिखामै,
उलटे उनही दपट भगामै।
हमही निबल कै जान मेहरिया रोज बोलामय थाने,
बलम सोचय म झुखाने।।
पेट पेंटागन जेठ दुपहरी,
बागा थे फिफियाँन कचेहरी।
खेती बारी कुरकी होइगे दूनव बैल बिकने,
बलम सोचय मा झुखाने।
हमरे बिधायक रसिया बड़े है,
जब देखय खटिया म पडे है।
उनही घर से दूरी राखय कउनों न कउनों बहाने,
बलम सोचय मा झुखाने।
इस तरह श्री हरि कुशवाह , हरि, अपने क्षेत्रीय मुहाबरे लोकोक्तियों और प्रतीकों को अपने कविताओ में सजोते हुए अनेक गीत और ग़जल लिखे है।

मंगलवार, 4 नवंबर 2025

तुम बत्तीसी काढ़ दिहा

तुम बत्तीसी  काढ़  दिहा औ खीस निपोरे चले गया। 
गील पिसान हमार देख परथन का बटोरे चले गया।। 


सिसकत राति से पूछि लिहा कस लाग पलेबा खेते मा 
तुम बिदुरात साँझ देखय का बड़े अँजोरे चले गया।। 


 गाय बिआन ता बनी पेंउसरी  पै पेटपोछना  नहीं  रहा 
पूरा दिन महतारी रोयी  तुम बिन मुँह फोरे चले गया।। 


जब से रोमा झारिस नफरत प्रेम का रकबा घटा खूब 
खसरा  माही  दर्ज  खैरिअत  झूंटय  झोरे चले गया।। 


काल्ह  फलनिया  कहत  रही या सरबार मा  गाज गिरै 
कउनव  साध न पूर भयीं , बस गउखर जोरे चले गया।।


चित्रकूट मा दीपदान का खासा जबर  जलसा भा हंस 
पै तोहार नजर  गदहा  हेरैं  ता उनखे  ओरे चले  गया।। 
हेमराज हंस - 

सरग से नीक मोरे देस कै य धरती ही,

             छन्द  सरग से नीक मोरे देस कै य धरती ही, जिव से है अधिक पियार बंदेमातरं। ताजमहल  से ही स्‍वारा आना सुंदर य, आपन माटी देश कै सिं...