BAGHELI SAHITYA ( बघेली साहित्य )
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मंगलवार, 28 जुलाई 2026
बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : नल कुबेर के हिदय मा,
शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026
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रात रात भर जाग के कागद रगे हजार।
पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।
महाकवि आचार्य भगवत दुबे - जबलपुर
मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026
सरग से नीक मोरे देस कै य धरती ही,
छन्द
सरग से नीक मोरे देस कै य धरती ही,
जिव से है अधिक पियार बंदेमातरं।
ताजमहल से ही स्वारा आना सुंदर य,
आपन माटी देश कै सिंगार बंदेमातरं॥
बहै नदी कलकल पानी करै छलछल,
टेराथें पहार औ कछार बंदेमातरं।।
जहां बीर बलिदानी भारत का बचामै पानी,
बलिदान होइगें पुकार बंदेमातरं॥
दोहा
बंदेमातरम मा भरा, देस राग का कोस।
आंखर आंखर मा हबै, देसभक्ति का जोस।।
उनही सौ सौ नमन जे किन्हिन जीबन हूम।
बंदेमातरम बोल के, गें फांसी मा झूम।।
बन्देमातरम गाइ के, देस लिहिस एक मोड़।
भिन्न भिन्न मत का दिहिस, एक मन्त्र मा जोड़।।
आबा सब जन पुन करी, नेम प्रेम कै बात।
भारत के दुसमन हमैं, नफरत के उत्पात ।।
हेमराज हंस - भेंड़ा मैहर
सम्पर्क - 9575287490
जहाँ बघेली आय के, होइगै अगम दहार।
जहाँ बघेली आय के, होइगै अगम दहार।
काकू जी के बोल का,नमन है बारम्बार।।
शम्भू काकू ता अहीं, रिमहाई के सिंध।
देह धरे गाबत रहा,मानो कबिता बिंध।।
गाँउ गली चउपाल तक, जेखर बानी गूँज।
काकू जी ता भें अमर,ग्राम गिरा का पूज।।
लिहे घोटनी चलि परैं,जब कबिता के संत।
कविजन काकू का कहैं, रिमही केर महंत।।
जेखे कबिता के बिषय, आँसू आह कराह।
अच्छर फरयादी बने, काकू खुदइ गबाह।।
आखर आखर मा बसय,काकू कै कहनूत।
हंस बंदना कइ रहा, धन्न बघेली पूत।।
हेमराज हंस भेड़ा
सोमवार, 9 फ़रवरी 2026
KAVI SAMMELAN -BAKIYA REWA 09.02.2026
शनिवार, 7 फ़रवरी 2026
शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026
मंजू परिणय भास्कर 4 .2 .2026
गुरुवार, 22 जनवरी 2026
MAHA KAVI SAMMELAN SATNA 22.01.2026
सोमवार, 29 दिसंबर 2025
बुधवार, 10 दिसंबर 2025
श्री शिवशंकर सरस जी
श्री शिवशंकर सरस जी, बोली के चउमास।
उनसे छरकाहिल रहैं, तुक्क बाज बदमास।।
सादर ही सुभकामना, जनम दिना कै मोर।
रिमही मा हें सरस जी , जस पाबस का मोर।।
हेमराज हंस
गुरुवार, 27 नवंबर 2025
गदहा परेशान है गईया के प्रतिष्ठा मा।।
सुमर कै नजर नित रहा थी बिष्ठा मा।
हमीं कउनव सक नहीं ओखे निष्ठा मा।।
सेंतय का झारन मा जरा बरा जात है
गदहा परेशान है गईया के प्रतिष्ठा मा।।
हेमराज हंस
मंगलवार, 25 नवंबर 2025
उच्च कोटि के नीच
राहू अमरित पी लिहिस, जनता ओसे हीच।
अइसै हेमय समाज मा, उच्च कोटि के नीच।।
कहिन भुसुण्डी सुन गरूड़, तजै सुभाव न नीच।
गंग नहा ले सुमर चह ,तउ पुन लोटय कीच।।
हेमराज हंस
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