बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
राहू अमरित पी लिहिस, जनता ओसे हीच।
अइसै हेमय समाज मा, उच्च कोटि के नीच।।
कहिन भुसुण्डी सुन गरूड़, तजै सुभाव न नीच।
गंग नहा ले सुमर चह ,तउ पुन लोटय कीच।।
हेमराज हंस
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