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मंगलवार, 25 नवंबर 2025

उच्च कोटि के नीच

 

राहू अमरित पी  लिहिस, जनता ओसे हीच। 

अइसै हेमय समाज मा, उच्च कोटि के नीच।। 


कहिन भुसुण्डी सुन गरूड़, तजै सुभाव न नीच।

गंग नहा ले सुमर चह ,तउ पुन लोटय कीच।।

हेमराज हंस  

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर