यह ब्लॉग खोजें

सोमवार, 3 नवंबर 2025

हम उनही दिल दइ दीन्ह्यान

 हम उनही दिल दइ दीन्ह्यान अब गुर्दा माँगा थें। 

बारिस  मा  सब सरि गै धान  ता  उर्दा माँगा थें।।

स्वस्थ बिभाग के सेबा से गदगद हें सब रोग बिथा 

अस्पताल   से   हरबी    छुटटी    मुर्दा माँगा थें।। 

हेमराज हंस 

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर