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मंगलवार, 4 नवंबर 2025

केत्ते अपराधी निता

 पूछ रही ही दलन से, दरबारन कै ईंट।

केत्ते अपराधी निता, ही आरक्षित सीट।।

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर