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मंगलवार, 4 नवंबर 2025

सीताफल पहिले कटहर रहा

 बघेली कविता 

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उइ कहा थें सीताफल पहिले कटहर रहा। 

ओखा  खांय   मा   बड़ा   अटहर     रहा।।

अब खिआत खिआत  होइगा चुनू बूदा। 

यतना सुनतै  एक बांदर डाल से कूदा।। 

कहिस काहे लबरी बतात्या है 

हमीं लगा थी गिल्लिआन । 

हम मनई बनै का 

घिस रहे हन आपन 

पूंछ पै आजु तक नहीं खिआन।।

अब हम डारबिन से मिलय का 

बनबाय रहे हन  बीजा। 

फुरा जमोखी करामैं का 

साथै लइ जाब एक ठे

 दुरजन   भतीजा। 

कहब की पच्छिम कै  बात 

पूरब माँ लागू  नहीं होय। 

आजा का जनम  नाती के

 आगू नहीं होय।।  

मनई कबहूँ नहीं रहा बांदर। 

हाँ जबसे हम श्री राम जू के 

सेना मा भर्ती भयन 

तब से समाज मा  खूब हबै आदर।  

तब से हमूं गदगद हयन मन मा। 

चित्रकूट अजोध्या औ  देखा 

बृंदाबन मा। 

✍️हेमराज हंस 

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