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बुधवार, 10 दिसंबर 2025

श्री शिवशंकर सरस जी


 श्री शिवशंकर सरस जी, बोली के चउमास। 

उनसे छरकाहिल रहैं, तुक्क बाज बदमास।। 

सादर ही सुभकामना, जनम दिना कै मोर। 

रिमही मा हें सरस जी , जस पाबस का मोर।।  

हेमराज हंस 

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर