बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता
गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
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रविवार, 28 जून 2015
मौन के पीड़ा की अनुभूति देखिये।
मौन के पीड़ा की अनुभूति देखिये। सदाचार का भ्रष्टो से सहानुभूति देखिये। । विश्वास आहत हो रहा है लोक तंत्र का पदों औ क़दों की प्रतिभूति देखिये। । हेमराज हंस
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