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शुक्रवार, 5 जून 2015

hemrajhans------उनकी गुण्डागर्दी देखो।

मुक्तक 

यार उनकी गुण्डागर्दी देखो। 
ऊपर से हम दर्दी देखो। । 
घाव से मजाक करती है 
पीड़ा नाशक हल्दी देखो। । 
हेमराज हंस --9575287490 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर