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सोमवार, 8 जून 2015

bagheli अम्मलक जना थै उनखे चाल से।

मुक्तक 

अम्मलक जना थै उनखे चाल से। 
हरिश्चंद  समझौता है नटवर लाल से। । 
लबालब भरा है ता आज उई टर्रा थें 
सब गूलर भाग जई है सूख ताल से। । 
हेमराज हंस --9575287490 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर