मुक्तक
अम्मलक जना थै उनखे चाल से।
हरिश्चंद समझौता है नटवर लाल से। ।
लबालब भरा है ता आज उई टर्रा थें
सब गूलर भाग जई है सूख ताल से। ।
हेमराज हंस --9575287490
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
मेरी पसंद -------------- रात रात भर जाग के कागद रगे हजार। पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार। महाकवि आचार्य भगवत दुबे - जबलपुर
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