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रविवार, 28 जून 2015

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli boliभरे आषाढ़ मा बरदा हेराय गा।

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli boliभरे आषाढ़ मा बरदा हेराय गा।: बघेली बोली  भरे आषाढ़ मा बरदा हेराय गा।  जइसा रीढ़ हीन का गरदा हेराय गा। ।  अब 'चाल चेहरा चरित्र 'कै चर्चा नही चलै  घिनहा पा...

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर