यह ब्लॉग खोजें

शुक्रवार, 26 जून 2015

bagheli boliभरे आषाढ़ मा बरदा हेराय गा।

बघेली बोली 

भरे आषाढ़ मा बरदा हेराय गा। 
जइसा रीढ़ हीन का गरदा हेराय गा। । 
अब 'चाल चेहरा चरित्र 'कै चर्चा नही चलै 
घिनहा पानी निकरैं का नरदा हेराय गा। । 
हेमराज हंस     >  9575287490 

कोई टिप्पणी नहीं:

SATNA --22.01.2026