यह ब्लॉग खोजें

सोमवार, 8 जून 2015

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli अम्मलक जना थै उनखे चाल से।

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : bagheli अम्मलक जना थै उनखे चाल से।: मुक्तक  अम्मलक जना थै उनखे चाल से।  हरिश्चंद  समझौता है नटवर लाल से। ।  लबालब भरा है ता आज उई टर्रा थें  सब गूलर भाग जई है सूख ताल...

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर