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सोमवार, 1 जून 2015

bagheli kavita वमै डबरा योजना का पड़बा देखाई थे। ।

मुक्तक 

आबा ! गाँव मा शौचालय का गड़बा देखाइ थे। 
वमै डबरा योजना का पड़बा  देखाई थे। । 
ब्यवस्था बताऊ थी वजट कै कमी ही 
हम छूँछ सरकारी भड़बा देखाई थे। । 
हेमराज हंस --9575287490 

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर