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रविवार, 28 जून 2015

तोहरे प्रेम के चिन्हारी अस।

तोहरे प्रेम के चिन्हारी अस। 


गउद औ पइनारी अस। । 
सरा थी आंसू मा 
जीवन के अमारी अस। । 
हेमराज हंस 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर