यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, 24 जून 2015


संस्कार कै हाट लगी है पै  ही महग बाजार। 
इहव सदी माही गरीब के पढ़य कै  नहि  आय तार 

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर