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शनिवार, 10 जून 2023

उमिर भै अस्सी पार तउ, रोगी हमैं बिचार।

 मनो  रोग  के  बैद से, कर  बाई    उपचार ।
उमिर भै अस्सी पार तउ, रोगी हमैं बिचार।। 
कर  बाई   उपचार, दृष्टि मा दोख है दददा।  
चीकन चांदन राह, लगै अपना का खडडा।। 
बलिहारी या समय का कइसा हबय कुजोग। 
जे हमार सम्माननीय ,ग्रस्त हें  मन के रोग। । 

 

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर