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बुधवार, 7 जून 2023

बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : जाति बाद मा बंद

बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : जाति बाद मा बंद: राष्ट्रबाद  से  सुरू भा ,जाति बाद मा बंद।  केत्ते सुर बदलय परें, गामय का एक छंद।। हेमराज हंस     

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर