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गुरुवार, 12 फ़रवरी 2015

बघेली मुक्तक

बघेली मुक्तक 


हम जेहि मान्यन की बहुतै बिजार  है। 
लगथै   भाई  व  बरदा   गरिआर  है। । 
जब  उनसे पूंछ्यांन  ता कहाथें फलाने 
दहकी ता दहकी नही दल  का सिंगर है। । 


अब   सेंतै  लागै   माख  फलाने। 
हा तुमहिंन सबसे बांख फलाने। । 
तुहिन  लगाये   रह्या अदहरा 
तुहिन उचाबा राख फलाने। ।   


कवि -हेमराज त्रिपाठी ''फलाने ''
         भेड़ा मैहर मप्र 
9575287490 

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर