यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, 11 फ़रवरी 2015

BAGHELI SAHITYA: बघेली छन्द

BAGHELI SAHITYA: बघेली छन्द: बघेली  छन्द  उई कहाथें  देस से गरीबी हम भगाय देब , गरीबी या देस कै लुगाई आय नेता जी।  गरीबी भगाय के का खुदै तुम पेटागन मरिहै , व त...

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर