यह ब्लॉग खोजें

शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : हमरे टोरिअन काही खाये जा थै दइया रे।

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : हमरे टोरिअन काही खाये जा थै दइया रे।:              बिटिया  ठुम्मुक ठुम्मुक जाथी  स्कूले ड्रेस पहिर के बइया रे।  टाँगे बस्ता पोथी पत्रा बिटिया बनी पढ़इया रे। ।  खेलै चन्द...

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर