बघेली मुक्तक
आबा भाई आँसू पोंछी पचके पचके गाल से।
नही ता अब वा ओरहन देई पं दीनदयाल से। ।
टूट बडेरी अस जिंदगानी पाछू बइठ समाज के
अजुअव ओढ़काबा है टटबा जेखे सत्तर साल से। ।
हेमराज हंस
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें