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सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

सिंहासन से पूछती

सिंहासन से पूंछती श्रम सीकर की बूंद।
मेरे हित में आप ने क्यों ली आँखें मूंद।।

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर