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मंगलवार, 16 जनवरी 2018

bhopa vindhya mahotsav

जाना हमको कही था मिला कही का यान।
फिर चालक भी नशे मे कैसे हो कल्यान।।

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर