एक बार महामना मालवीय जी स्नान हेतु प्रयाग संगम पधारे वहां के पंडो में उनको नहवाने की होड़ लग गई। तभी मालवीय जी ने कहा की जिससे एकदम शुद्ध स्वस्ति वचन आता हो वही हमें स्नान के लिए ले चले ,तभी एक सयाने पण्डे ने कहा चलिए पंडित जी हम स्नान कराएँगे। वह मालवीय जी को संगम में ले जाकर गंगा जल ले कर बोला ,सम्माननीय आप देश के श्रेष्ठतम विद्वान हैं। ये बताइये इधर कौन है वे बोले गंगा उधर , यमुना और सरस्वती ? वो विलुप्त हैं। पांडा जी ने कहा जिस देश में सरस्वती विलुप्त हों वहां शुद्ध शुद्ध स्वस्ति उच्चारण कौन कर सकता है --बकौल -मदन मोहन मिश्र वाराणसी
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
यह ब्लॉग खोजें
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
लेबल
- अपरेसन सिन्दूर
- कबिबर रामनरेश
- कवि सम्मेलन
- कवि अनमोल बटरोही
- कामिल बुल्के
- कुण्डलिया
- छणिका .
- जन्म दिन
- जयराम शुक्ल जी
- तुलसीदास
- दोहा
- धरोहर
- नबा सम्बत
- नौ रात्रि
- परशुराम
- परिचय
- बघेली गजल
- बघेली छन्द
- बघेली कविता
- बघेली क्षणिका
- बघेली दोहा
- बघेली दोहे संग्रह
- बघेली मुक्तक
- बघेली मुक्तक.
- मंचीय मुक्तक
- मुक्तक
- मेरी पसंद
- मैहर जिला
- रामनरेश तिवारी जी
- विजयनारायण राय
- श्री शिवशंकर सरस जी
- संकलित
- संस्मरण
- सम्मान
- स्मृति शेष
- हनुमान चालीसा
- हिन्दी साहित्य
- होली
- ATALJI
- BABU JI
- bagheli muktak
- doha
- KAVI HARI KUSHWAHA MAIHAR
- KAVI MITRA
- KAVI SAMMELAN
- kavita
- KUMBH 2025
- muktak
- SHLOK
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें