बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
जेही पामय के निता, रहंय लालायित लोग।
कीन्हिन दूषित दुस्ट जन, बाला जी का भोग।।
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