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शुक्रवार, 20 सितंबर 2024

 जेही पामय के निता,  रहंय  लालायित लोग। 

 कीन्हिन दूषित दुस्ट जन, बाला जी का भोग।।  


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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर