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रविवार, 23 फ़रवरी 2025

 पत्तन से छन  के आबै  बिरबा तरी घाम। 

आबा हो बटोही थोरी कइ  ल्या आराम।।  


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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर