यह ब्लॉग खोजें

सोमवार, 20 मार्च 2023

बम चकाचक होरी है।
रंगन मा दहबोरी है।।
नस्सा माही लस्सा ले थी
शहर गाँव हर खोरी है।।

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर