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शनिवार, 29 अप्रैल 2023

लगथै उनखर उतरिगा जादू।

 लगथै  उनखर उतरिगा  जादू।
हेरा  आन  गुनिया  अब   दादू।।

कब तक सूख   पेड़ का द्याहा  
पुन  पुन पानी  पुन  पुन खादू।।

बजरंगी का  कब तक छलिहै
कालनेम   बन  ज्ञानी  साधू ।।

एक न मानिस हिरना कश्यप
खुब समझा के हार कयाधू।।

हेन जन जन के कंठहार हें 
ओछी जात के आल्हा धांधू।। 


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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर