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शनिवार, 9 दिसंबर 2023

भइलो चलें देखामय भाटा।।

जब जर माही परिगा माठा। 
भइलो चलें देखामय भाटा।। 
एक कई खुब चहल पहल ही 
एक  कई  पसरा  सन्नाटा। ।  

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर