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सोमवार, 20 जनवरी 2020

हम सामर तैं गोर फलनिया rimhi kavita

तै लगते इन्दौर फलनिया 

हम सामर तैं गोर फलनिया।
बड़ी मयारू मोर फलनिया। । 

जीवन के ताना -बाना कै । 
तैं सूजी हम डोर फलनिया। । 

हम रतिया भादव महिना कै । 
तैं फागुन कै भोर फलनिया। । 

रिम झिम रिम झिम प्रेम के रित मा । 
हम मेघा तैं मोर फलनिया। । 

हम हन बिंध अस  ठगे ठगे  । 
तैं लगते इन्दौर फलनिया। । 

हिरदय भा कोहबर अस बाती । 
जब हंस से भा गठजोर फलनिया। । 


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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर