यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, 26 अक्टूबर 2022

विंध्य सतपुड़ा से शिखर ,लगते दोनों आप। 

दोनों के दर्शन हमें , लगते पुण्य प्रताप। । 

 

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर