बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
विंध्य सतपुड़ा से शिखर ,लगते दोनों आप।
दोनों के दर्शन हमें , लगते पुण्य प्रताप। ।
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