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शनिवार, 19 अप्रैल 2025

सिसकि रहा बंगाल


 बोल बघेली बोल 

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कखरी म लड़िका लये, मारत रही गोहार ।

टुकुर टुकुर देखत रही,  दूरी से सरकार  । ।


आँसू पीरा का लये, सिसकि रहा बंगाल।
ममताहीन ममता भयीं, बेलगाम चंडाल।।

धूं धूं  कइके घर बरा, फूंक दिहिन सब  गाँव । 

हमला  काही  कहि  रहें, उइ  दंगा  सहनाव।। 

हेमराज हंस  

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर