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रविवार, 13 अप्रैल 2025

बंगाल मा ! हा हा कार मचा है

मदारी  रोबा  थें    बांदर    रोबा थें। 
परिबार बिलखत है बिरादर रोबा थें।। 
बंगाल  मा !  हा  हा  कार मचा   है 
उइ  356   धरे  आँधर   सोबा थें। । 
हेमराज हंस  

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर