बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
बोल बघेली बोल
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हमरे देस मा बन चुके, खासे निर्मल गाँव।
लोटिआ लै बाहर चलीं, बहू बराये पांव।।
हेमराज हंस
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