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सोमवार, 14 अप्रैल 2025

हमरे देस मा बन चुके

बोल बघेली बोल 

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हमरे देस मा बन चुके, खासे निर्मल गाँव। 

लोटिआ  लै बाहर  चलीं, बहू बराये पांव।। 

हेमराज हंस  

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर