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बुधवार, 6 अप्रैल 2022

बड़े अदब से बोलिए,

बड़े अदब से बोलिए, उनखर जयजयकार। 
नस्सा माही सांझ ही, फड़ मा बइठ सकार।। 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर