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शनिवार, 23 अप्रैल 2022

दानी ता दानी उंइ सूम तक का जानाथें।

दानी ता दानी  उंइ सूम तक का जानाथें। 
बड़े अंतरजामी हें बाथरूम तक का जानाथैं।। उनसे खुई कइ के सुंग कण्व न बनाबा 
उंई मंत्र पिंडदान से हूम तक का जानाथैं।। 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर