बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
देखा अपने देस मा, प्रेम औ भाइपचार।
हिंआ कांगरेसी करैं, भाजपा केर प्रचार।।
हेमराज हंस
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