बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
उइ बात बड़ी ठोस औ प्रमानिक बताऊ थें।
सामाजिक जहर का टानिक बताऊ थें।।
जब उनही देखाय लाग दाई का माइक
ता उइ घोर नास्तिक का पुरानिक बताऊ थें। ।
हेमराज हंस
एक टिप्पणी भेजें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें