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सोमवार, 21 दिसंबर 2015

BAGHELI SAHITYA गुण्डा घर अस बखरी द्याखा। ।

समय कै घूमत चकरी द्याखा।
गुंडन कै पैपखरी द्याखा। । 
पीपर अस आक्सीजन देतीं 
गुण्डा घर अस बखरी द्याखा। । 
हेमराज हंस 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर