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बुधवार, 9 दिसंबर 2015

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : BAGHEKI MUKTAK

BAGHELI SAHITYA बघेली साहित्य : BAGHEKI MUKTAK: टी. वी मा सभ्भदारन का नमूना देख ल्या।  जुज्बी नही दोउ जूना देख ल्या।   ।  जउन अड़सठ साल से लगाबा जा रहा है  उनखे बेलहरा का चूना देख ल्या।...

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर