यह ब्लॉग खोजें

बुधवार, 9 दिसंबर 2015

BAGHEKI MUKTAK

टी. वी मा सभ्भदारन का नमूना देख ल्या। 
जुज्बी नही दोउ जूना देख ल्या।  । 
जउन अड़सठ साल से लगाबा जा रहा है 
उनखे बेलहरा का चूना देख ल्या। । 
हेमराज हंस 

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर