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रविवार, 10 जनवरी 2016

काल्ह मिला एक ठे मतदाता।

काल्ह मिला एक ठे मतदाता। 
कहिस कि आय गें ज्वारैं नाता। । 
अबै तक बुजबुजी नही चली। 
अब बागै लागें गली गली। । 
छोड़ के ए सी महल अटारी। 
कुच्छ न पूछा हाल बिहारी। । 

हेमराज हंस 

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मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर