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रविवार, 3 जनवरी 2016

दृढ़ता से आतंक का जो कर सके इलाज। ।

आने वाली पीढ़ियाँ कर सकती हैं नाज़। 
दृढ़ता से आतंक का जो कर सके इलाज।  ।  
हेमराज हँस

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर