जब जब हमने यारी की है।
तो उसने मक्कारी की है। ।
चाहे हो कारगिल य पठानकोट
दोस्ती के नाम पे ग़द्दारी की है। ।
हेमराज हँस
तो उसने मक्कारी की है। ।
चाहे हो कारगिल य पठानकोट
दोस्ती के नाम पे ग़द्दारी की है। ।
हेमराज हँस
बघेली साहित्य -का संग्रह हास्य व्यंग कविता गीत ग़ज़ल दोहा मुक्तक छंद कुंडलिया
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