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सोमवार, 11 जनवरी 2016

ठगी गै जनता खूब। हेमराज हंस

पिछले सत्तर साल से ठगी गै जनता खूब। 
नेतन कै गोनियाँ लदी जंतै दोनियाँ दूब। । 
हेमराज हंस 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर