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रविवार, 30 मार्च 2025

चल रही गाड़ी राम भरोसे।

 चल रही गाड़ी राम भरोसे। 
ढ़ड़क रही  ही ढोसे  ढोसे। । 

उइ  भाईचारा कै बात करा थें  
चक्कू  लये  औ  कट्टा खोसे। । 

तुहूँ  खूब  फरगाय  लिहा 
पसगइयत  थर्रा थै ओसे।। 

पहँसुल मा  काटा थें  सुपारी  
सनकी मारै सरउंता मोसे। 

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मेरी पसंद

मेरी पसंद  -------------- रात रात भर जाग के  कागद  रगे हजार।  पर दोहा हम लिख सके मुश्किल से दो चार।  महाकवि आचार्य  भगवत दुबे - जबलपुर